हिंदू धर्म प्रारंभ से खोटा सिक्का था- डॉ. आंबेडकर - संदर्भ हिंदू धर्म पर आधारित हिंदू राष्ट्र और उसके नायक कैसे होंगे !
“हिदू धार्मिक और सामाजिक व्यवस्था इस प्रकार की है कि आप उसके आदर्श को वास्तविकता नहीं बना सकते, क्योंकि ये आदर्श निंदनीय हैं, न ही आप वास्तविकता को उच्चता तक की अवस्था तक पहुंचाने का प्रयास कर सकते हैं, क्योंकि जो वास्तविकता है, अर्थात वर्तमान स्थिति है, वह तो निकृष्ट से भी निकृष्ट है।...हिंदू धर्म प्रारम्भ से ही खोटा सिक्का था। हिंदू धर्म द्वारा निर्धारित हिंदू समाज का आदर्श हिंदू समाज पर नैतिक ह्रास और पतनशील प्रभाव डालने वाला था। वह अपने स्वरूप और सारभूत तत्व में नीत्से ( जर्मन दार्शनिक, हिटलर का प्रेरणास्रोत) के समान था। वह प्रत्येक प्रकार से नीत्शेवादी है। नीत्शे के जन्म से बहुत पहले मनु द्वारा वह सिद्धांत घोषित किया गया था, जिसका प्रचार नीत्शे ने किया। यह ऐसा धर्म है जो स्वाधीनता, समानता और भ्रातृत्व स्थापित करने पक्ष में नहीं है। यह घोषणा करता है कि हिंदू समाज में अन्यों द्वारा मानवेत्तर ब्राह्मणों की पूजा की जाए।”
( रानाडे, गांधी और जिन्ना, पृ.104, डॉ. आंबेडकर के भाषण)
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